Aarti Kunj Bihari ki|आरती कुंज बिहारी की

Aarti Kunj Bihari ki: आरती बिहारी (Kunj Bihari) भगवान श्रीकृष्णजी के एक प्रमुख नामों में से एक है। इस नाम का अर्थ होता है “रास लीला का सुखद भोगी” या “रास के आनंद में रत”। कुंज बिहारी भगवान के प्रेम और भक्ति के साथ जुड़े हुए हैं।

कुंज बिहारी का मंदिर, वृंदावन में स्थित है, भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है। इस मंदिर में भगवान कुंज बिहारी की मूर्ति स्थित है, और यहां हरिनाम संकीर्तन और भगवान की भक्ति का आयोजन होता रहता है।

आज के हमारे इस पोस्ट में आ देखेंगे इसी कुंज बिहारी जी के प्रमुख भजन की लिरिक्स। तो बने रहें इस पोस्ट पर अंत तक।

आरती कुंज बिहारी की

आरती कुंज बिहारी की 

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की 

आरती कुंज बिहारी की 

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

आरती कुंज बिहारी की 

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की 

आरती कुंज बिहारी की 

श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की

गले में वैजयंती माला

बजावै मुरली मधुर बाला ला

श्रवण में कुण्डल झल काला

नंद के आनंद नंदलाला

गगन सम अंग कांति काली

राधिका चमक रही आली

रतन में ठाड़े बनमली

भ्रमर से अलक कस्तूरी तिलक

चंद्र सी झलक

ललित छवि श्यामा प्यारी की

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

आरती कुंज बिहारी की

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

आरती कुंज बिहारी की 

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

कनकमय में मोर मुकुट बिल से

देवता दर्शन को तरसे

गगन सो सुमन राशि बरसे

बजे मूरचंग

मधुर मिरदंग

ग्वालिनी संग 

अतुल रति गोप कुमारी की

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

आरती कुंज बिहारी की 

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

आरती  कुंज बिहारी की 

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

जहां ते प्रकट भई गंगा

सकल मल हरिणी श्री गंगा

स्मरण ते हो मोह भंग

बसी शिव शीश

जाटा के बीच

हरै अघ कीच

चरण छवि श्री बनवारी की

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

आरती कुंज बिहारी की

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

आरती कुंज बिहारी की 

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

चमकती उज्ज्वल तट रेनू

बज रही वृंदावन वेनू

चहूं दीशी गोपी ग्वालन धेनू

हंसत मृदु मंद

चांदनी चंद

कटक भव फंद

टेर सुनू दीन दुखारी की

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

आरती कुंज बिहारी की 

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की 

आरती कुंज बिहारी की 

श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की

आरती कुंज बिहारी की 

श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की

 Aarti Kunj Bihari ki

Aarti Kunj Bihari  ki 

Shri Giridhar Krishna Murari ki

Aarti Kunj Bihari ki 

Shri Giridhar Krishna Murari ki 

Aarti Kunj Bihari ki 

Shri Giridhar Krishna Murari ki 

Aarti Kunj Bihari ki 

Shri Giridhar Krishna Murari ki

Gale mein baijanti mala

Bajave Murali Madhur bala

Shravan mein Kundal jhalkala

Nand ke Anand nandlala

Gagan Sam ang Kanti Kali

Radhika chamak Rahi Kanti aali

Latan mein thade banmali

Brahman si alag Kasturi Tilak

Chandrasheel jhalak

Lalit chhavi Shyama pyari ki

Shri Giridhar Krishna Murari ki

Aarti  Kunj Bihari ki

Shri Giridhar Krishna Murari ki

Aarti Kunj Bihari ki 

Shri Giridhar Krishna Murari ki

Kanak main mor mukut bil se

Devta Darshan Ko tarse

Gagan so Suman Rashi beer se

Baje mor Chang

Madhur mere Dang

Gwalini Sangh 

Atul Rathi gop Kumari ki

Sri Giridhar Krishna Murari ki

Aarti Kunj Bihari ki

Shri Giridhar Krishna Murari ki

Aarti Kunj Bihari ki 

Shri Giridhar Krishna Murari ki

Jahan te prakat bhai Ganga

Sakal mal harini Shri Ganga

Smaran te hoot moh bhanga

Bassi Shiv shish

Jata ke bich

Harei agh keech

Charan chhavi Shri banvari ki

Shri Giridhar Krishna Murari ki

Aarti Kunj Bihari ki

Sree Giri Dhar Krishna Murari ki

Aarti Kunj Bihari ki 

Shri Giridhar Krishna Murari ki

Chamakte Ujjwal tat train renu

Baj Rahi Vrindavan  Venu

Chahun dishi Gopi gwal dhenu

Sansad mridu mand

Chandni Chand

Katat  bhav phand

Tere Sunu din dukhari ki

Sri Giridhar Krishna Murari ki

Aarti Kunj Bihari ki 

Shridhar Krishna Murari ki

Aarti Kunj Bihari ki 

Shri Giridhar Krishna Murari ki

Aarti Kunj Bihari ki 

Shri Giridhar Krishna Murari ki

Author: Allinesureya

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