2024 Me Mundan Sanskar Ka Uttam Muhurt Kab Kab Hai Jankari


2024 Me Sanskar Ka Muhurat: मुंडन संस्कार छोटे बच्चे के लिए एक प्रमुख दिन है। क्योंकि इस दिन उसका विशेष मुंडन संस्कार पहली बार होगा। इसका हिंदू मान्यताओं में बहुत महत्व होता है। इस दिन शिशु के पैदाइशी पहली बालों को मुंडवाया जाता है। और उसके नए जीवन की शुरुआत होती है। इस पर माना जाता है कि ऐसा करने से बच्चे की लंबी उम्र होती है, उसके स्वास्थ्य अच्छे रहेंगे, उससे हर सकता से मुक्ति मिलती है, उसका आने वाला भविष्य उज्ज्वल होगा।

इस दिन बच्चे के लिए विशेष पूजा की जाती है, मंत्रो का उच्चारण किया जाता है। बच्चे के बाल को छोटे चम्मच या फिर कोई छोटी कंघी से उसके सारे बालों को मुंडवाया जाता है।

बच्चे का मुंडन कौन से महीने में करना चाहिए?Mundan Sanskar Time

जन्म के कितने समय बाद करना चाहिए मुंडन संस्कार? शिशु के जन्म लेने के बाद 1 साल के के समय में या फिर तीसरे साल पांचवे साल, या फिर सातवे साल में बच्चे का मुंडन हो जाना चाहिए। ज्योतिष पंचांग के अनुसार बच्चे का मुंडन संस्कार के लिए सबसे शुभ तिथि द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी तिथि अति शुभ मानी जाती है। जब भी आपको अपने शिशु की मुंडन संस्कार करनी हो तो इस शुभ अवसर पर ही करें।

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मुंडन के लिए कौन सी जगह अच्छी है?

श्री शीतला माता मंदिर एक आदर्श स्थान है एक शिशु की मुंडन संस्कार पहली बार करने के लिए। यह गुरु द्रोणाचार्य की पत्नी कुलदेवी कृपी (किरपई) को समर्पित है। जिस कारण यह एक अच्छी जगह है सकती है।

मुंडन के बाद बच्चे के सिर पर क्या लगाते हैं?

बच्चे का मुंडन संपन्न हो जाए तब उसके पूरे सिर पर घी या हल्दी का लेप कर सकते हैं। ऐसा करने से बच्चे के बाल तो अच्छे आएंगे ही साथ ही साथ बच्चे के कोमल सर पर लगे उस्तरे के घाव से भी राहत मिलती है।

मुंडन के बाद बालों का क्या करें?

जब मुंडन संस्कार समाप्त हो जाए तो कुछ छन रुके फिर बच्‍चे के स‍िर पर अच्छे से घी की मालिश कर ले जिससे बच्‍चे को आराम मिले। आप चाहे तो नारियल का तेल भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अब इसके बाद बच्चे के उस बाल को किसी परित्र स्थान पर ले जाए, या किसी नदी के किनारे रख दें।

 

क्या नवरात्रि में मुंडन हो सकता है?

नवरात्रि एक शुभ समय होता है, इस समय माता का हमारे घरों में आगमन होता है। इस दौरान सभी शुभ कार्यों के आयोजन होता है। लोग मां की पूजा अर्चना करते हैं। वैसे तो यह एक धार्मिक समय ही होता है पर इस दौरान विवाह का शुभ योग नहीं माना जाता। इसलिए शादी को छोड़ कर अन्य शुभ कार्य जैसे गृह प्रवेश, मुंडन, पूजा इत्यादि कर सकते हैं। नए रिश्ते तय हो सकते है पर अभी शादी करना उचित नहीं समझा जाता। तो आप बिल्कुल नवरात्रि में मुंडन संस्कार कर सकते हैं।

क्या अमावस्या पर मुंडन किया जा सकता है?

अमावस्या पर शुभ कार्यों को करना शुभ नहीं माना गया है। इस दौरान कोई भी कार्य नहीं किए जाते और ना ही किसी शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। इसलिए इस दिन मुंडन संस्कार न करें।

क्या हम शनिवार को मुंडन कर सकते हैं?

वैसे तो मुंडन संस्कार को संपन्न करने के लिए शुभ दिन शुक्रवार को होता है। यह पूरे सप्ताह का सबसे शुभ दिन माना जाता है। शुक्रवार के अलेव अन्य शुभ दिन सोमवार, बुधवार और गुरुवार, इस दिन भी आप चूड़ाकरण या मुंडन संस्कार करा सकते हैं।

मुंडन संस्कार को हिंदी में क्या कहते हैं?

बच्चे के मुंडन संस्कार को हिंदी में मुण्डन (चूडाकर्म) संस्कार भी कहा जाता है।

इस संस्कार में एक शिशु के लिए एक विशेष दिन रक्खा जाता है। इस दिन शिशु के पैदाइशी सिर के बाल को पहली बार उतारे जाते हैं।जिसे पारंपरिक रीति रिवाज में इसे मुण्डन संस्कार कहा जाता है। इस संस्कार को शिशु की आयु एक वर्ष की होने के भीतर तक ही करा लेंना चाहिए। अगर किसी कारणवश आप ऐसा इस समय नहीं करा पा रहे हैं तो आपके लिए और भी समय है। इस संस्कार को आप शिशु के तीसरे वर्ष में भी करा सकते हैं।

मुंडन का शुभ दिन कब है?

मुंडन के अनेकों शुभ दिन बताए गए हैं। आप इसे देख कर अपने लिए एक अच्छा दिन चुन सकते हैं।

मुंडन संस्कार के लिए बताए गए शुभ दिन है
द्वितीया,
तृतीया,
पंचमी,
सप्तमी,
दशमी,
एकादशी और
त्रयोदशी तिथि शुभ बताई जाती है।
वहीं अश्विनी, मृगशिरा, पुष्य, हस्त, पुनर्वसु, चित्रा, स्वाति, ज्येष्ठ, श्रवण, धनिष्ठा और शतभिषा नक्षत्र भी मुंडन संस्कार के लिए अति शुभ फलदायक होते है।
आप इनमें से कोई भी अच्छा समय देखकर बच्चे का मुंडन करा सकते हैं।

Author: Allinesureya