गायत्री मंत्र|संपूर्ण गायत्री मंत्र का अर्थ हिंदी में|जाप विधि|लाभ और नुकसान

गायत्री मंत्र हर शुभ कार्य को लेकर उपयोग में लाया जाता है। इसलिए यह में एक प्रमुख मंत्र माना जाता है और इसे वेदों में ब्रह्मा से सम्बंधित मंत्र माना जाता है। यह मंत्र संस्कृत में लिखा गया है और यह ऋग्वेद के एक मंत्र समूह का हिस्सा भी है, जिसे “तृतीया मंत्र” भी कहा जाता है। गायत्री मंत्र ब्रह्मा जी से संबंधित है। इसकी हर एक लाइन के अर्थ में यह हमे ब्रह्मा जी से संबंध बताता है।  चूंकि ब्रह्मा जी ही पूरे सृष्टि के रचियता हैं तो यह मंत्र काफी महत्वूर्ण हो जाती है। 

गायत्री मंत्र|गायत्री मंत्र लिखा हुआ|गायत्री मंत्र हिंदी में|गायत्री मंत्र का अर्थ

ओम भूर्भुवः स्वः
तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात्।

गायत्री मंत्र के भावार्थ 

1. ओम की मधुर ध्वनि से परम ब्रह्मा के लिए होता है। इस ओम की ध्वनि ब्रह्मा को प्रदर्शित करती है। 

2.  भूर्भुवः स्वः का मतलब विभिन्न लोकों से होता है। जिनमे भूर्लोक, भुवर्लोक, स्वर्लोक होते है और यह पंक्ति इन्हीं की प्रार्थना करता है।

3. तत्सवितुर्वरेण्यं का अर्थ है वह परमात्मा जो सबका उत्पत्ति का कारक है।उनकी पूजा और उपासना करनी चाहिए।जिससे कि हमारा कल्याण हो सके।

4. भर्गो देवस्य धीमहि अर्थात् हम लोगों को दिव्यता और पवित्रता की ओर  बढ़ते जाना चाहिए। अपनी प्रवृत्ति में दिव्यता और पवित्रता लाना चाहिए।

5. धियो यो नः प्रचोदयात् इस पंक्ति में कहा गया है कि हमारी बुद्धि की शुद्धि करें ताकि हमारी प्रवृति अच्छी हो सके। और हमें लोग सत्य की ओर आगे बढ़ाते रहे।

इस गायत्री मंत्र का जाप करने वाले जातक की आत्मा में शुद्धि, बुद्धि और आध्यात्मिक का विकास होता है। अपने जीवन में उसे सफलता प्राप्त होती है।

यही मंत्र ऋग्वेद से लिया गया है और इसे सबसे शक्तिशाली मंत्र माना जाता है। ऋग्वेद जो अपने आप में एक महत्व स्थान रखता है जो हमें यह शक्तिशाली गायत्री मंत्र भी देता है। यह मंत्र हमे बताता है कि जो सृष्टि के स्वामी है वे सबके आत्मा, ज्ञान और दिव्य शक्तियों के श्रोतों के पिता है। जिनके उपासना से हमे अपने जीवन में लाभ प्राप्त होगा। उन्ही मे से एक है गायत्री मंत्र। जिसके जाप से हमे अपने जीवन में अनेकों लाभ मिलते हैं।और आध्यात्मिक विकास के क्षेत्र में सहायक होता है। जीवन के हर क्षेत्र में यह मंत्र हमारे लिए सहायता प्रदान करता है। जी मंत्र के साथ पूरी सृष्टि संपूर्ण हो जाती है।

गायत्री मंत्र सिद्धि कैसे करे?

दोस्तों आपने जाना गायत्री मंत्र के बारे में यह मंत्र कितना शाक्तिशाली है। पर अब बात आती है कि आखिर यह मंत्र को  सिद्धि करने के लिए क्या करना होता है। यह बहुत ही आसान काम है। इसमें आपको सिर्फ कुछ देर आस्था के  साथ मन में शांति बना के  रहना है। आगे आपको निरंतर सदाचार के साथ रहना है। इस पुरेंडिं में जब तक कि आपकी जाप खत्म नहीं हो जाती आपको सैयाम और धैर्य से खुद के साथ रहे। और खुद में ध्याद दे। बाकी आपको प्ता है कि श्रद्धापूर्वक जप करना होता है। इसमें निरंतरता, निष्ठा, और श्रद्धा की आवश्यकता होती है। यहां कुछ उपाय हैं जो आपको गायत्री मंत्र सिद्धि में मदद कर सकते हैं:

1. निरंतर जप

  किसी अच्छे दिन का चयन कर  गायत्री मंत्र को निरंतर और नियमित रूप से जपने की शुरुआत कर सकते है ताकि आपको इस काम में सिद्धि मिले।
    सुबह या शाम एक निश्चित समय खुद के लिए देख कर निश्चित कर ले। और हर रोज उस जगह पर टाइम से जाए और मौन रहे खुद को शांत करे। उसके बाद एक निश्चित संख्या में मंत्रों का जप करना शूरू करें।

2. शुद्धि धारण

   स्नान और पूजा पाठ के पश्चात्, ध्यानपूर्वक बैठ जाता और  मंत्र का जप करें।
मैं में शांति बनाए रखे ताकि आप अपने मंत्र में ध्यान लगा सके। ताकि आप अपने लक्ष्य से ना भटके। और मंत्र सिद्धि करने  के लिए आपकी मानसिक और भौतिक शुद्धि का ध्यान जरूर रखें। खुद में श्रद्धा के भाव बनाए रखे जिससे की आपकी प्रक्रिया आसान हो सके।  

ॐ उच्चारण करने के फायदे

हनुमान जी बीज मंत्र

गायत्री मंत्र के फायदे और इसके नुकसान

गायत्री मंत्र के फायदे

1.  गायत्री मंत्र के नियमित जप से व्यक्ति की आत्मा का शुद्धिकरण होता है जिससे व्यक्ति की आत्मा में उज्ज्वलता आती है। जो उसके जीवन को सफलता के लिए एक नया अनुभव नई दृष्टि देती है। इससे उसके जीवन में काफी बदलाव आते है। जो बहुत शुभ होते हैं।

2. गायत्री मंत्र के जप करने से बुद्धि का विकास तेजी से होती है और व्यक्ति अति बुद्धिमान साबित होता है। जिससे उसके ज्ञान  में वृद्धि होती है और व्यक्ति बहुत बुद्धिमान, ज्ञानी और चतुर बनता है।

3. गायत्री मंत्र के जप से उस व्यक्ति को भी बहुत लाभ होता है जिस व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास की कमी है। यह मंत्र के जाप से आत्मविकास में सहायक होता है।

4. गायत्री मंत्र का जप करने से व्यक्ति में आध्यात्मिक साक्षरता बढ़ती जाती है। वह विद्वानों के तरह बन जाता है। उसके आत्मा में खुद के प्रति विश्वास प्रदान करता है।वह  खुद के साथ संबंध स्थापित करता है।

5.  गायत्री मंत्र के निरंतर जप करने से मानव और प्राकृतिक शक्तियं जो कि हमे कभी दिखाई नहीं देती पर यह सिर्फ वे है लोग महसूस कर सकते है जिन्होंने इस गायत्री मंत्रो को सही से जाप किया  हो। इसलिए इस मंत्र के जाप  से हमे प्राकृतिक के बीच संतुलन स्थापित करने में बहुत सहायता होती है।

गायत्री मंत्र के नुकसान

वैसे तो गायत्री मंत्र के कोई नुक्सान नहीं होते लेकिन दोस्तो हमे हर ची का उपयोग सही सलाह से ही करना चाहिए । जिससे कि उसके अच्छे परिणाम आ सके। किसी चीज की शुरुआत करते समय हमे यह ध्यान भी रखना जरूरी होता है कि इसके कोई नुक्सान तो नहीं है। 
पर गायत्री मंत्र के वैसे तो कोई नुक्सान नहीं है लेकिन इसकी सरी विधि जन कर ही जाप शुरू करनी चाहिए ताकि आपको इसके अच्छे परिणाम मिले। और आप अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सके। और मंत्र जपा से होने वाले सारे लाभ आपको मिले।

गायत्री मंत्र जाप

गायत्री मंत्र का जाप करने की विधि:

1. किसी भी धार्मिक चीजों को रकरने के लिए हमे स्थिरता और ध्यान की जरूरत होती है। इसलिए आप भी इस गायत्री मंत्र के जाप के समय शांत रहे। साफ और एक साफ स्थान  चुनें, ध्यान रक्खे की वहा आपको कोई भी दूसरा व्यक्ति परेशान न करें। एक साफ आसान ले। सुबह या शाम को मंदिर में बैठें। साथ ही अपने साथ एक माला भी ले ले । इसकी सहायता से आप आसानी से मंत्र जपा कर सकते है।   

2. अपने मन शांत करे। अब गायत्री मंत्र पर सारा ध्यान केंद्रित करें और धीरे-धीरे उच्चारण की शुरुआत करें। 

 मंत्र: “ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।”

शुरुआत आप धीरे धीरे बोल कर करे फिर बाद में आप तेज बोल सकते है। जिससे आपको मंत्र उच्चारण में कोई भी तकलीफ नहीं होगी।

3. अब माला को अपने दाहिने हाथ के अंगूठे और मध्यमा उंगली के बीच रखें।
   मंत्र को एक माला के एक मोती के साथ जपें, फिर अगले मोती पर जाएं। 

4. जप खत्म होने के बाद, अपना ध्यनवाद अर्पण करे। सुख शांति प्राप्ति की कामना करें। 
यह गायत्री मंत्र का जाप करने की एक सामान्य विधि है।

FAQ

Q. मंत्र कैसे लिखा जाता है?

ओम भूर्भुवः स्वः
तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात्।

Author: Allinesureya

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