Siddh Kuber Yantra Kya Hai-Puja Vidhi|Mantra|fayde|लाभ और उपयोग

कुबेर देवता, हिन्दू संस्कृति में धन, धान्य, और समृद्धि के देवता के रूप में पूजे जाने वाले एक प्रमुख देवता हैं। वेद, पुराण, और तांत्रिक ग्रंथों में उनके महत्वपूर्ण स्थान का उल्लेख है। पौराणिक साहित्य में एक महत्वपूर्ण देवता जिनका वर्णन पुराण, और तांत्रिक ग्रंथों में है, जो उनके महत्व को बताता है।

कुबेर यंत्र के अनेकों तरह से उपयोग होता है यह केवल धन के प्राप्ति के लिए ही नहीं होता, बल्कि यह भी व्यक्ति को सात्विक बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से युक्त करने में भी मदद करता है। यंत्र का सही उपयोग करने से व्यक्ति अध्यात्मिक और आर्थिक दृष्टि से समृद्धि की ओर बढ़ सकता है। इसलिए इस लेख में, हम कुबेर देवता के बारे में अधिक जानने का प्रयास करेंगे। उनके स्वरूप, विशेषताएं, और पूजा के विधान पर चर्चा करेंगे।

कुबेर देवता की विशेषताएं

कुबेर देवता को लोग धन, समृद्धि, और ऐश्वर्य के देवता के रूप में मानते हैं। उन्हें धनाधिपति भी कहा जाता है क्योंकि वे धन की प्राप्ति में प्रमुख रूप से सहायक होते हैं। कुबेर की वाहनता एक मनि कौआ होता है जिसे पुराणों में पुष्पक विमान के समान बताया गया है। यह वाहन उनके धन और समृद्धि के साथ होते हैं।

कुबेर को यक्षराज और लंकापति भी कहा जाता है। उनका स्वरूप अत्यंत सुंदर और ऐश्वर्य से भरपूर होता है। उनके सिर पर कोई कमीज़ नहीं होती और वे स्वर्णरूप में आकारित होते हैं। कुबेर का मुख्य आधार विशेष रूप से भगवान शिव के द्वारका राजा की तरह होता है।

कुबेर देवता का स्वरूप

कुबेर देवता को धन के पालने वाले और यक्षराज कहा जाता है। उनकी छवि मुख्यतः सुंदर, स्वर्णमय, और श्रीमंत होती है। कुबेर के दो पत्नियाँ, राक्षसी भद्रा और सुंदरी, भी उनके साथ पूजी जाती हैं। वह विशेषता से लोगों को धन और समृद्धि की देने वाले रूप में पूजे जाते हैं।

कुबेर देवता की उत्पत्ति

कुबेर की उत्पत्ति का कथा महाभारत और पुराणों में विभिन्न रूपों में मिलता है। कुबेर की उत्पत्ति के विषय में कई पुराणिक कथाएं हैं। उनमें से एक कथा की अगर मानें तो वे लंका और राक्षसों के राजा रावण के भाई थे। उन्होंने उन्होंने कठोर तपस्या और कठोर भक्ति की। जिसका परिणाम यह हुआ कि इस कठोर तप के कारण ब्रह्मा जी उनसे खुश हो कर उन्हे वर्षा का वरदान दे दिया। और इस तरह कुबेर को वर्षा  प्राप्त हुई थी। फिर इस घटना के बाद उन्हें लंका का भी राजा घोषित कर दिया गया। और वे धन के अधिपति बन गए, जिसे बाद उन्हें “कुबेर” कहा जाने लगा।

कुबेर का स्वामित्व

हम सभी जानते हैं कि कुबेर का स्वामित्व धन के क्षेत्र में है और वे लोकपालों में से एक माने जाते हैं। उन का दूसरा नाम यक्षराज भी है क्योंकि वे यक्षगण के राजा हैं और यक्षपति के रूप में उन्हें पूजा जाता है।

कुबेर की दो पत्नियाँ हैं – राक्षसी भद्रा और सुंदरी। इन दोनों पत्नियों के साथ ही उनके पुत्र मानका भी हैं, जो अपने पिता के साथ समृद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है।

कुबेर देवता की पूजा विधि

कुबेर की पूजा के विभिन्न तरीके होते है, लेकिन यह सामान्यत: एक विशेष मुहूर्त में किया जाता है। लोग धन प्राप्ति और आर्थिक समृद्धि के लिए विशेष रूप से कुबेर देवता की आराधना करते हैं। उनके पूजन में फल-फूल, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। मंत्र जाप के साथ ही कुबेर यंत्र का भी उपयोग किया जाता है, जिसे श्रद्धा भाव से करने से लाभ मिलती है। यहां एक प्रमुख पूजा विधि दी जा रही है:

कुबेर की पूजा विधि के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन करें:

1. स्नान (शुद्धि) – पूजा  प्रारंभ करने के लिए सबसे पहले स्नान करनी होगी। निर्मल पानी या गंगा जल से नहाकर शुद्ध हो ले।

2. पूजा स्थल स्थापना –  पूजा स्थलों की भी सफाई कर ले। फिर कुबेर की मूर्ति या यंत्र को पूजा स्थल पर स्थापित करें।

3. कलश स्थापना – एक कलश में पानी, सुगंध, फूल, अक्षत, रुपया और धूप डाल लें। उसके बाद कलश को स्थापित करें।

4. गणपति पूजा –  गणपति की पूजा सबसे पहले करें लें, क्योंकि यह ऐसे भगवान है जिनकी आराधना सबसे पहले होती है, और यह पूजा का एक सुखद फलों देने वाला एक नियम है।

5. कुबेर पूजा – अब इसके बाद कुबेर की मूर्ति या यंत्र को पूजें। यंत्र को शुद्ध करके उस पर स्वर्ण रंग के वस्त्र चढ़ाएं। धूप-दीप, फल-फूल,चावल, कुमकुम, अक्षत, सिक्के, बिल्वपत्र और नैवेद्य के साथ कुबेर यंत्र की पूजा आराधना करें।

6. मन्त्र जप – कुबेर मंत्रों का जाप विधि पूर्वक करें, जैसे कि “ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यासमृद्धिं में देहि दापय स्वाहा।”

अर्थ – हे यक्षराज कुबेर, वैश्रवण के स्वामी, कृपया करके मुझे धन, धान्य, और समृद्धि प्रदान करें।

इस मंत्र का जाप करते समय ध्यान रखें कि आप पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ कर रहे हैं। मंत्र का नियमित जाप करने से धन और समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है, लेकिन यह अभ्यास ईमानदारी, कर्मठता, और निःस्वार्थ भाव से करें। मंत्रों का उच्चारण और उपयोग शास्त्रों और गुरुकुलों के मार्गदर्शन में किया जाना चाहिए, ताकि वे सही रूप से फल प्रदान कर सकें।

7. आरती – कुबेर की आरती गाएं और उन्हें प्रसाद का भोग लगाए।

8. प्रदक्षिणा और प्रणाम – कुबेर की मूर्ति के चारों ओर प्रदक्षिणा करें और प्रणाम करें और अपनी इच्छा प्रकट करें।

9. प्रसाद वितरण – आरती के बाद प्रसाद आपके परिवारों के बीच वितरण करें।

10. व्रत और दान – कुबेर पूजा के बाद दिनों में व्रत रखना और धन का दान करना भी विशेष होता है। पूजा के बाद दान करना  आपके लिए उपयुक्त होता है।

यह सभी कदम विशेष संस्कृति और परंपराओं के आधार पर हैं।

इसे भी पढ़ें: शनि देव मंत्र की संपूर्ण विधि

कुबेर का यंत्र

कुबेर यंत्र, हिन्दू धर्म में धन, समृद्धि, और लक्ष्मी के देवता कुबेर की आराधना के लिए एक महत्वपूर्ण और शक्तिशाली उपाय है। यंत्र शब्द संस्कृत भाषा से आया है जिसका अर्थ “यान्त्र” या “उपाय” होता है। कुबेर यंत्र का उपयोग धन और समृद्धि को बढ़ाने तथा लक्ष्मी कृपा प्राप्त करने, और व्यापार में सफलता प्राप्त करने के लिए कारगर साबित होता है।

कुबेर यंत्र का प्रभाव प्राचीन समय से ही होता आ रहा है, और यह हिन्दू धर्म में विशेष महत्वपूर्ण स्थान भी रखता है। यंत्र की पूजा विधि के साथ शुद्धता और ईमानदारी के साथ आराधित करना चाहिए ताकि उसका संपूर्ण लाभ ले सके। यंत्र धन और समृद्धि के क्षेत्र में एक प्रमुख उपाय के रूप में कारगर है, व्यक्ति अगर सही रूप से इस यंत्र की आराधना करें तो उसे इन लक्ष्मीपूर्ण गुणों का अनुभव करने का अवसर प्रदान होता है।

वैसे तो यंत्र का निर्माण सिर्फ विशेष मुहूर्त में किया जाता है और इसमें कुबेर देवता की यंत्र, छवि, मंत्र, और उनके विशेष चिन्हों को समाहित किया जा सकता है। यंत्र को सकारात्मक ऊर्जा के साथ आराधना करने से व्यक्ति को धन और समृद्धि में सुधार हो सकता है।

Author: Allinesureya

1 thought on “Siddh Kuber Yantra Kya Hai-Puja Vidhi|Mantra|fayde|लाभ और उपयोग

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *