Surya Dev Mantra

Surya Dev Mantra: सूर्य देव, हिन्दू धर्म में एक प्रमुख देवता है जिनको सूर्य मंडल का स्वामी कहा जाता है। उनके अनेकों नाम हैं जैसे आदित्य, विवस्वान, सविता, भानु, दिनकर, अर्क, रवि इत्यादि। इन विभिन्न नामों से ही सूर्य के विभिन्न रूप और गुणों की प्रतीक्रिया भी होती है।

सुर्य देव के रूप और विशेषताएं

वेदों में सूर्य देव को सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, और सर्वव्यापी माना गया है । उन्हें सृष्टि के पालक और सूर्य मंडल के अधिपति बताया गया है। सूर्य का आदित्य रूप ही उनका प्रमुख स्वरूप है, जो कि पूरे सूर्य मंडल को निर्देशित करता है और वह जीवन का भी स्रोत है।

सुर्य देव के पौराणिक कथाएं

 पौराणिक कथाओं की अगर बात करें तो उसमें, सूर्य देव का जन्म कई रूपों में भिन्नता प्रदर्शित करता है। एक कथा के अनुसार, सूर्य देव आदित्य कश्यप और आदिति की संतान हैं। उनके पंच पुत्रों को आदित्य या सूर्य पुत्र कहा जाता है, जिनमें हनुमान जी भी शामिल होते है।

सूर्य देव का पौराणिक महत्व

सूर्य की पूजा भारतीय समाज में सुर्योपासना के रूप में अपनाई जाती है। उनके लिए आराधना के लिए कई त्योहार मनाए जाते हैं, जैसे छठ पूजा और सूर्य जयंती। छठ पूजा बिहार, झारखंड, और उत्तर प्रदेश में विशेष रूप से मनाई जाती है और इसमें सूर्य देव की पूजा व्रत के साथ होती है।

सूर्य देव और विज्ञानिक महत्व

सूर्य के प्रति भक्ति का अर्थ नहीं केवल धार्मिक ही नहीं है, बल्कि विज्ञान में भी इसका महत्व बताया गया है। सूर्य हमारे सौरमंडल का एक केंद्र है और यह सभी ग्रहों को अपने चारों ओर घुमाता है और इसके बिना जीवन असंभव है। सूर्य की ऊर्जा ही हमारे जीवन का स्रोत है।

सूर्य देव के परिवार

सूर्य देव की पत्नी सरस्वती है और उनके साथ तीन पुत्र हैं – यम, विवस्वान, और शनि। इनके अलावा, सूर्य देव के पास सात रथ यानी कि सप्तरथ भी हैं, जिन्हें सप्तऋषि कहा जाता है। ये सप्तऋषि अपने आप में ही बहुत उपयोगी हैं। ये सप्तऋषि मंडल को सूर्य के आस-पास घूमने वाले सात ग्रहों को प्रतिनिधित्व करते है।

सूर्य देव के पूजा में अनेक मंत्र हैं, जो कि उनकी कृपा और आशीर्वाद को बनाए रखने में मदगार होती हैं। चलिए जन लेते हैं सूर्य देव के मंत्रो को:

1. ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः।

2. ॐ आकाशात् पतितं तोयं यथा गच्छति सागरम्। सर्वदेवनमस्कारः केशवं प्रतिगच्छति।।

3. उदये ज्योतिर्नमस्युः सूर्याय व्योम यानि रुद्र दिवि चरात्।

4. ॐ सूर्याय नमः अरुणाय नमः भानवे नमः।

5. ॐ खगाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्।

6. ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्।

7. ॐ ह्रीं खगाय विद्महे कामराजाय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्।

8. ॐ सूर्याय नमः सोमाय नमः बुधाय नमः।

9. ॐ भानवे नमः चंद्रसुधन्वने नमः धात्रे नमः।

10. ॐ तप्तकाञ्चनगौराङ्गाय रविंधिस्मयकृत्तये।

11. ॐ उद्याचलत्पदोज्ज्वलत् पाटलीं वेष्टयन्नितम्।

12. ॐ सर्वलोकपिताराय नमः।

13. ॐ ह्रीं ह्रां ह्रौं सः सूर्याय नमः।

14. ॐ आदित्याय विद्महे साहस्रकिरणाय धीमहि तन्नो भानुः प्रचोदयात्।

15. ॐ अर्काय नमः आदित्याय नमः विवस्वते नमः।

16. ॐ ह्रीं ह्रां ह्रौं सः सूर्याय नमः।

17. ॐ आपात्कालत्रयाय विद्महे महातेजाय धीमहि तन्नो आदित्यः प्रचोदयात्।

18. ॐ विश्वरूपाय नमः सवित्रे नमः सूर्याय नमः।

19. ॐ ह्रीं ह्रां ह्रौं सः सूर्याय नमः।

20. ॐ आदित्याय विद्महे धात्रे नमः।

ये मंत्र सूर्य देव की पूजा-आराधना में उपयोग होते हैं। पूजा के समय श्रद्धा और समर्पण  भाव के साथ इन मंत्रों का जाप करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं।

Author: Allinesureya

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