अहोई माता की व्रत कथा|पुजा विधि|आरती|Ahoi Ashtami 2024

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आहोई माता हमारे सांस्कृतिक विरासत में महत्वपूर्ण एक माता के रूप में जानी जाती है। उत्तर भारत में आहोई माता की पूजा उपासना और व्रत कथा प्रसिद्ध है। अहोई माता का व्रत विशेषकर संतान सुख के लिए किया जाता है।

“आहोई माता” का अर्थ है “ओ, माँ!” और अहोई माता एक मातृ देवता का रूप हैं। इस व्रत का समय नवरात्रि के दौरान होता है, क्योंकि नौ दिनों तक आहोई माता की पूजा अर्चना की जाती है।

आहोई माता की कथा में से एक सामान्य कथा यह है कि एक गांव में एक माता थीं जिसने अपने बच्चों की रक्षा के लिए अपनी जीवन कुर्बान कर दिया था।

बात करे इस पूजा की तो मै आपको बता दू कि इस पूजा में माता की मूर्ति को विशेष रूप से श्रृंगार कर पूजा की जाती है और व्रत की कथा भी सुनी जाती है। सभी भक्त व्रत के अंत में अपना अपना व्रत को तोड़ते हैं और माता से प्राथना करते है और आशीर्वाद मांगते हैं।

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अहोई अष्टमी का मतलब क्या होता है?

अहोई अष्टमी हमेशा कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाने वाला एक पर्व है। इस दिन विशेष पूजा माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और तरक्की के लिए करतीं हैं। साथ ही इस दिन वे व्रत भी रखती हैं। यह दिन माता और उनकी संतानों के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इसलिए इस विशेष दिन पर माताएं अपने जीवन में संतान प्राप्ति के लिए भी व्रत कर सकती हैं। क्योंकी अहोई माता की पूजा संतान प्राप्ति के लिए भी किया जाता है। अहोई अष्टमी नवरात्रि पर्व का आठवां दिन होता है। अहोई माता, माता पार्वती का एक रूप होती हैं। माता पार्वती की ही पुजा अहोई माता के रूप में अहोई अष्टमी के रूप में किया जाता है। माता पार्वती दुर्भाग्य को टालने वाली आदिशक्ति देवी हैं। जिस कारण इस दिन विशेष पूजा माता पार्वती के रूप में होती होती है। 

 “अहोई” शब्द का अर्थ होता है “ओ, माँ!” इसलिए इस दिन का महत्व माता से होता है। और माता अपने पति और बच्चों की लंबी उम्र के लिए इस दिन व्रत रखती हैं। इस व्रत से अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण होता है।

अहोई अष्टमी की पूजा का समय सूर्यास्त के बाद का होता है। विशेषकर शाम के समय ही अहोई माता की पूजा अर्चना की जाती है। माता की चित्र के सामने दीपक जलाकर एक जल से भरा हुआ कलश को स्थापित करें। 

अहोई अष्टमी पूजा सामग्री

1. जल
2. मां की तस्वीर
3. फल, फूल
4. गाय का दूध
5. चावल
6. सिंदूर
7. मिट्टी का दीपक
8. रोली
9. काजल
10. चूड़ियां
11. लाल वस्त्र
12. बिंदी
13. मिठाई
14. सिंघाड़ा
15. गाय का घी

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अहोई अष्टमी की पूजा विधि

अहोई माता की पूजा के लिए सबसे पहले आप सुबह जल्दी उठने की कोशिश करे। ताकि आप अपना बाकी का काम शुरू कर सकें। चलिए जानते है कि आपको इस दिन क्या करना है और कब करना है। जिसको करके आप अपना व्रत सफल बना सकें।

1. अहोई अष्टमी के दिन प्रातः उठ कर स्नान कर लें।

2. मन्दिर में जाकर पूजा करे। फिर पूरे दिन निर्जला व्रत रखें।

3. सांय काल की पूजा के लिए महिलायें दीवार पर पेंटिंग या मिट्टी की मूर्ति बनाती हैं। अब उसके सात संतानो का चित्र बनायें। कुछ महिलाएं चांदी की मूर्ति जिस पर दो मोती पड़े हों उसकी भी पूजा करती हैं। साथ ही तारों को देख कर पूजा शुरू की जाती है।

4. पूजा सामग्री में अनाज या चावल , मूली और सिंघाड़े रखें।

5. पूजा के पास आते की रंगोली बनाए। साथ एक लोट  में जल भर कर रखें।

6. अब माता के सामने दीपक जलाकर आरती करें। और पाठ भी करें।

7. अब चांद और तारे को देख कर अर्क दे। अब किसी बुर्जुग महिला को खाना खिलाएं और उन्हें अपनी तरफ से कुछ दान देकर उनसे आशीर्वाद ले।

अब आप अपनी सारी पूजा विधि के साथ करने के बाद आप अपना  व्रत खोल कर भोजन ग्रहण कर सकतीं हैं।

आहोई माता की आरती

जय अहोई माता,
जगदम्बे भवानी।  
तेरे रूप को सलाम,
अम्बे माँ की जय।  

जय अहोई माता,
चंद्रमा को चान्दनी।  
राती रात तेरे भक्त जगाएं।  

जय अहोई माता,
जगदम्बे भवानी।  
तेरे रूप को सलाम,
अम्बे माँ की जय। 

जय अहोई माता,
मैया तुमको नमन।  
दुर्गा रूप निरंतर
समस्त जगत जननी।  

जय अहोई माता,
तुम हो विश्व में शक्ति।  
हम सभी भक्त तेरे
चरणों में शरण।  

जय अहोई माता,
तुम हो भुवनेश्वरी।  
सभी दुखों को हरनेवाली
दुर्गा माँ की जय।  

जय अहोई माता,
जगदम्बे भवानी।  
तेरे रूप को सलाम,
अम्बे माँ की जय।  

जय अहोई माता,
जगदम्बे भवानी।  
तेरे रूप को सलाम,
अम्बे माँ की जय।

यह माता की एक सामान्य आरती है। आप अपनी पूजा में इस आरती को शामिल कर सकते हैं। या फिर इसकी 2-4 लाइन भी गा सकते है। जिससे आपकी पूजा सफल होगी।

स्याहु क्या होता है? शाहू माता की कहानी

स्याहु एक चांदी के लॉकेट का बना होता है और इसे अहोई अष्टमी पूजा सामग्री में शमिल किया जाता है। इस पर अहोई अष्टमी के दिन कुमकुम का टीका लगाकर पूजा की जाती है। इस पर कलावा या मौली में अच्छे से पिरोकर पहना जाता है। यह जाता के लिए एक रक्षा सूत्र की तरह काम करता है। इस माला के जब भी एक साल पूरे होते हैं तो इस पर नई चांदी की मोती चढ़कर पहना जाता है।

FAQ

Q. अहोई अष्टमी में किसकी पूजा होती है?

अहोई अष्टमी में अहोई माता की पूजा की जाती है। जो कि माता पार्वती का एक रूप होती हैं।

Q.  माता का व्रत क्यों किया जाता है?

माता अपनी संतानों की सुख समृद्धि और तरक्की के लिए अहोई माता का व्रत करती हैं।

Q. अहोई अष्टमी व्रत में क्या खाना चाहिए?

यह हर व्रत के जैसे ही होता है, आप कोई भी सामान्य व्रत जैसे करते हो बिल्कुल उसी प्रकार अहोई अष्टमी व्रत भी है।

Q. अहोई अष्टमी के व्रत में पानी पी सकते हैं क्या?

अहोई अष्टमी करवा चौथ के समान होता है। वैसे तो इस दिन माताएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और पूरे दिन पानी भी नहीं पीती हैं । पर आप को ज्यादा प्यास लगी हो तो पी भी सकते हैं।

Q.अहोई माता का व्रत कब है?

अहोई अष्टमी नवरात्रि के आठवे दिन मनाया जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।

Author: Allinesureya

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